नक्षत्र 22 / 27 · लाहिड़ी निरयन
श्रवण नक्षत्र
श्रवण 27 नक्षत्रों में क्रम 22 पर है और निरयन राशिचक्र में मकर 10°00′ से 23°20′ तक फैला है। इसके स्वामी चंद्र हैं, देवता विष्णु — पालनकर्ता, प्रतीक कान और योनि का पशु वानर।

एक नज़र में
- विस्तार (निरयन)
- मकर 10°00′ से 23°20′ तक
- चंद्र राशि
- मकर
- स्वामी ग्रह
- चंद्र · विंशोत्तरी दशा 10 वर्ष
- देवता
- विष्णु — पालनकर्ता
- प्रतीक
- कान
- गण
- देव
- योनि (पशु)
- वानर (स्वाभाविक शत्रु: भेड़)
- नाड़ी
- अन्त्य
श्रवण कैसा है
श्रवण, ‘सुनना’, सुनने और सीखने का नक्षत्र है। देवता विष्णु हैं, पालनकर्ता, और स्वामी चंद्र, जो ग्रहणशीलता को स्थिर देखभाल से जोड़ता है। प्रतीक कान है, या तीन पदचिह्न, विष्णु के तीन डग। यह पूरी तरह मकर में है।
जब चंद्रमा श्रवण में हो
चंद्रमा यहाँ हो तो आप अच्छे श्रोता हैं, जल्दी सीखते हैं और ज्ञान को एक व्यक्ति या जगह से दूसरी तक पहुँचाने में कुशल हैं। शिक्षण, परामर्श, भाषाएँ, संगीत और संचार आपको रास आते हैं। जितना सुनते हैं उतना ही अपनी आवाज़ पर भरोसा करना सीख है।
संक्षेप में: अच्छे श्रोता और सीखने वाले — आप लोगों को जोड़ते हैं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हैं। विकास की एक उपयोगी दिशा: जो सुनते हैं, उतना ही अपनी आवाज़ पर भी भरोसा करना।
चंद्र श्रवण के स्वामी हैं, इसलिए यहाँ चंद्रमा होने पर जन्म चंद्र महादशा में होता है, जो कुल 10 वर्ष की है। उसमें कितनी शेष है, यह इस पर निर्भर है कि चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था। इसके बाद विंशोत्तरी क्रम मंगल की महादशा पर जाता है।
देवता और प्रतीक
ऋग्वेद में विष्णु के तीन डग पृथ्वी, अंतरिक्ष और स्वर्ग को नापते हैं। नक्षत्र का कान और तीन पदचिह्न उस ध्यान की बात करते हैं जो पूरे जगत में यात्रा करता है।
श्रवण का प्रतीक कान है और इसके देवता विष्णु — पालनकर्ता हैं।
चरण और नवांश राशियाँ
हर नक्षत्र के चार चरण हैं, प्रत्येक 3°20′ का, यानी राशि का नौवाँ भाग। जन्म के समय चंद्रमा जिस चरण में था, वही उसकी नवांश (D9) राशि देता है। श्रवण के चारों चरण ये हैं:
| चरण | अंश | चंद्र राशि | नवांश |
|---|---|---|---|
| 1 | 10°00′ – 13°20′ | मकर | मेष |
| 2 | 13°20′ – 16°40′ | मकर | वृषभ |
| 3 | 16°40′ – 20°00′ | मकर | मिथुन |
| 4 | 20°00′ – 23°20′ | मकर | कर्क |
इस प्रकार श्रवण का पहला चरण मेष नवांश में और अंतिम कर्क नवांश में पड़ता है।
कुंडली मिलान में श्रवण
साथी के रूप में श्रवण ध्यान देने वाला और निष्ठावान है, और उसे वह भाता है जो खुलकर बात करे और बदले में सुने।
अष्टकूट मिलान में श्रवण वानर योनि, देव गण और अन्त्य नाड़ी लाता है। योनि कूट (4 अंक) में दोनों का पशु एक हो तो पूरे अंक और पशु स्वाभाविक शत्रु हों तो शून्य; वानर का स्वाभाविक शत्रु भेड़ है। नाड़ी कूट (8 अंक) में दोनों की नाड़ी एक हो तो 0 अंक। ये एक ही तुलना के अंग हैं, किसी जोड़े पर निर्णय नहीं।
लोग अक्सर पूछते हैं
श्रवण नक्षत्र किस राशि में पड़ता है?
श्रवण पूरी तरह मकर में है, मकर 10°00′ से 23°20′ तक। इसलिए श्रवण में चंद्रमा हमेशा मकर का चंद्रमा होता है।
श्रवण का स्वामी कौन है और यह कौन-सी दशा आरंभ करता है?
श्रवण के स्वामी चंद्र हैं। जिसका जन्म चंद्रमा के श्रवण में होने पर हुआ हो उसकी विंशोत्तरी दशा चंद्र महादशा (कुल 10 वर्ष) से, जन्म पर बची शेष अवधि गिनकर, आरंभ होती है और फिर मंगल पर जाती है।
श्रवण की योनि क्या है और कुंडली मिलान में इसका क्या अर्थ है?
श्रवण की योनि वानर है, जो पूर्वाषाढ़ा के साथ साझा है। योनि कूट में दोनों साथियों का पशु एक हो तो 4 में से 4 अंक मिलते हैं और स्वाभाविक शत्रु (वानर और भेड़) हों तो 0; बाकी जोड़ियाँ 1 से 3 के बीच। शास्त्रों में योनि दो व्यक्तियों के बीच सहज प्रवृत्ति और शारीरिक सामंजस्य की बात करती है; यह आठ कूटों में से एक है।
श्रवण अच्छा नक्षत्र है या बुरा?
श्रवण न तो अच्छा है न बुरा। शास्त्र नक्षत्रों को किसी व्यक्ति के लिए अच्छा या बुरा नहीं ठहराते; हर नक्षत्र का अपना स्वभाव, शक्तियाँ और विकास-क्षेत्र हैं। श्रवण के लिए ग्रंथ यह कहते हैं: अच्छे श्रोता और सीखने वाले — आप लोगों को जोड़ते हैं और ज्ञान को आगे बढ़ाते हैं। विकास की दिशा: जो सुनते हैं, उतना ही अपनी आवाज़ पर भी भरोसा करना।
मैं अपना नक्षत्र कैसे जानूँ?
आपका जन्म नक्षत्र वह है जिसमें जन्म के समय चंद्रमा था, इसलिए इसके लिए जन्म की तिथि, समय और स्थान चाहिए। JYOTISH.info की मुफ़्त कुंडली लाहिड़ी अयनांश से इसे चरण सहित दिखाती है। चंद्रमा लगभग रोज़ एक नक्षत्र बदलता है, इसलिए जन्म-समय के बिना नक्षत्र अनिश्चित हो सकता है, और ऐप उसे अनुमानित चिह्नित करता है।
श्रवण का प्रतीक और देवता क्या हैं?
प्रतीक कान है और देवता विष्णु — पालनकर्ता। शास्त्र देवता के गुणों को नक्षत्र के स्वभाव से जोड़ते हैं।
इस पृष्ठ की हर स्थिति निरयन (सिडरियल) पद्धति से, लाहिड़ी अयनांश के साथ, astronomy-engine लाइब्रेरी (MIT लाइसेंस) से निकाली गई है। शास्त्र प्रवृत्तियों का वर्णन करते हैं; यह पृष्ठ मार्गदर्शन और आत्म-चिंतन के लिए है, कोई निर्णय नहीं, और किसी परिणाम का वादा नहीं। हमारी गणना कैसे होती है। कानूनी संदर्भ के लिए अंग्रेज़ी पाठ मान्य है; यह पृष्ठ वही बात हिंदी में कहता है। अक्टूबर 2026 में जाँचा गया.